➤ हिमाचल के 4 जिलों में आज आंधी-तूफान का यलो अलर्ट, ऊंचे क्षेत्रों में हल्का हिमपात संभव
➤ बारिश-बर्फबारी से तापमान में भारी गिरावट, कल्पा का अधिकतम पारा 8.5 डिग्री लुढ़कर 11.6 डिग्री पर पहुंचा
➤ 31 अक्टूबर से 2 नवंबर तक हल्की बारिश-बर्फबारी के आसार, 3 नवंबर के बाद मौसम साफ होने की उम्मीद
शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला समेत राज्य के अधिकांश हिस्सों में शुक्रवार सुबह से ही मौसम खराब बना हुआ है। मौसम विभाग ने कांगड़ा, मंडी, शिमला और सिरमौर जिलों में आंधी-तूफान का यलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान लाहौल-स्पीति, चंबा और किन्नौर की ऊंची चोटियों पर हल्का हिमपात होने की संभावना जताई गई है।
गुरुवार को हुई बारिश और हल्के हिमपात के बाद प्रदेश के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इससे पहाड़ी इलाकों में ठिठुरन बढ़ गई है। मौसम में आए इस बदलाव का असर ऊंचे और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में साफ दिखाई देने लगा है।
कल्पा में सबसे ज्यादा गिरावट
किन्नौर के कल्पा में अधिकतम तापमान 8.5 डिग्री सेल्सियस गिरकर 11.6 डिग्री रह गया। सोलन में अधिकतम तापमान 8 डिग्री की कमी के बाद 18 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राजधानी शिमला में 6.5 डिग्री की गिरावट के साथ तापमान 17 डिग्री रहा, जबकि कुफरी में 5.6 डिग्री की कमी के बाद अधिकतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
2 नवंबर तक बारिश-बर्फबारी के आसार
मौसम विभाग के अनुसार 31 अक्टूबर से 2 नवंबर तक भी प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या बर्फबारी हो सकती है। हालांकि शनिवार से किसी तरह का अलर्ट जारी नहीं किया गया है। इस दौरान केवल हल्की बूंदाबांदी की संभावना है।
3 नवंबर के बाद मिलेगी राहत
विभाग का कहना है कि 3 नवंबर के बाद मौसम साफ हो जाएगा। इससे तापमान में हल्की बढ़ोतरी होगी और लोगों को ठंड से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
सैलानियों और स्थानीय लोगों के लिए सावधानियां
आंधी-तूफान के अलर्ट के दौरान कमजोर पेड़ों, बिजली के खंभों और होर्डिंग्स के नीचे खड़े न हों। पहाड़ी सड़कों पर यात्रा करने से पहले मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी जरूर लें, क्योंकि बारिश और हिमपात के कारण फिसलन बढ़ जाती है। ऊंचे क्षेत्रों की ओर जाने वाले पर्यटक गर्म कपड़े साथ रखें और जरूरत न हो तो अनावश्यक सफर से बचें। बुजुर्गों, बच्चों और सांस या हृदय रोगियों को अचानक बढ़ी ठंड से बचाव के लिए विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। वाहन चलाते समय गति धीमी रखें और बर्फबारी वाले इलाकों में चेन का इस्तेमाल करें।



